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सोमवार, 12 अक्टूबर 2020

देश की सीमा पर तैनात जवान

 याद करो तुम वीर शहीदों के पावन फरमान को
सफल कभी न होने दिया है दुश्मन के अरमान को
याद करो भारत मां के पल पल के आह्वान को 
लिए तिरंगा हाथों में लड़े गए बलिदान को।।

याद करो तुम विक्रम बत्रा जैसे वीर जवान को
कारगिल में बढ़ा दिया था भारत मां के मान को
गिरि शिखरों पर कदम रखे लिए हाथ पे जान को
याद करो तुम भारत मां के बेटों के बलिदान को।।



सोमवार, 27 जुलाई 2020

चाय



हर सुबह जो छू लेती हो लबों को तुम
ताजगी लेकर  उतरती  हो रगों में तुम
हर घर में हर नुक्कड़ पर चाय के चर्चे हैं
शान्ति लेकर  उतरती हो  मनो  में तुम

✍🏻शिव शिल्पी

शायरी

गर फूलों में  खुशबू बरकरार  है
तो भंवरे फूलों पर आकर बैठेंगे।
और नाम तुम्हारा है बुलंदियों पर ,
तो दुश्मन भी दोस्त  बना बैठेंगे।।

शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

सुविचार


अपराधों को रुखसत कर दो,मानवता का सूर्य उदय हो।
Writer
Shiv Shilpi

गुरुवार, 23 जुलाई 2020

गजल

बहरे मुतकारिब मुसद्दस सालीम।
वज्न :122 122 122
विधा :नज़्म
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कहां तुम चले जा रहे हो
यहां से नजर आ रहे हो

सही राह तुम भूलकर के
गलत राह तुम जा रहे हो

तमों का  बसेरा  वहां पर
जहां आज तुम जा रहे हो

मंजर भी हिंसक हैं जहां के
उसी  राह तुम  जा  रहे हो

कमाई  गई  शोहरत  जो
मिटाने उसे  जा   रहे  हो

नशा लोभ लालच जहां पर
वहां तुम चले  जा  रहे  हो


✍🏻शिव शिल्पी

मुक्तक

गिरहबन्द कत्आ\ मुक्तक"
अर्कान : - मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन
वज्न :-1222 1222 122
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गरल अब वो उगलते जा रहे हैं
बुराईयों में ढलते जा रहे हैं।
मिटा कर नाम मेरा अपने दिल से,
वो अब तेवर बदलते जा रहे हैं।।

Writer :Shiv Shilpi





रविवार, 19 जुलाई 2020

कविता : मौन की शक्ति


विधा : कविता
                    "मौन की शक्ति"
               --------------------------

मौन आत्मज्ञान  का  द्वार है
मौन  शांति  का  आगार  है
है शीतलता का प्रखर स्त्रोत,
मौन की शक्ति अपरम्पार है।

                  मौन  शक्तियों का मूल मंत्र है
                  निश्चिंतता का सबल आधार है
                  है   बुद्धिमत्ता  का  मूल स्रोत
                  मौन की शक्ति  अपरम्पार है।।

तपस्वियों के तप से तपोभूमि का
कण कण मौन तत्व से साकार है
कुशल व्यवहार का प्रखर स्रोत है
मौन की शक्ति  अपरम्पार है।।

                     मौन रहना स्वयं का साक्षात्कार है
                     मौन स्वाध्याय का प्रमुख आधार है
                     स्वयं  महादेव भी मौन के धारक हैं
                     मौन    की  शक्ति  अपरम्पार  है।।

लेखक✍🏻: शिव शिल्पी











शनिवार, 27 जून 2020

Respect for women

Subject: Respect for women.

 You are an indelible symbol of cleanness.
 You are responsible for coldness.
 Women, you are the true story of love in the world.
 This is a sign of beauty


You give birth to a human and you are Kalratri for the wicked.
 You fought so many battle, killed the wicked.
 You are the basis of every story in history.

 You make the house a heaven, and teach children the values.

 Woman, you have created many patterns of success.
 Lakshmibai has fought battle to protect the country.
 Kalpana Chawla has Sunita Williams set foot in space.
 You are reaching every new target.

 You bless your parents by becoming a daughter.
 Being a sister, she ties a bond  on her brother's wrist.
 Being a wife, you show beauty.
 As a mother, you love children.
 You are the one who teaches the first step.
 You play many characters in the world, so you are called Shakti.
 You deserve great respect.
 Where you are a precious jewel, you are the hallmark of greatness.

 ✍️Shiv Shilpi

गुरुवार, 25 जून 2020

कविता :जिंदगी से वादा

विषय: जिन्दगी से वादा!

तूफान चाहे जितने आएं ,सह लेंगे हम हद से ज्यादा।
नहीं करेंगे आत्महत्या ,करते हैं हम जिन्दगी से वादा।।

सत्य असत्य चौसर के मोहरे,दोनों का है अलग इरादा।
सदैव सत्य अपनाएंगे ,करते हैं हम जिन्दगी से वादा।।

भूलेंगे न संस्कारों  को, गर बन भी जाएं हम शहजादा।
भूलेंगे न मात पिता को,करते हैं हम जिन्दगी से वादा।।

नहीं करेंगे किसी की हानि, हम रखें हमेशा नेक इरादा।
सदा  करेंगे  परोपकार, करते हैं हम जिन्दगी से वादा।।

सद्गुणों को धारण करके ,फिर करें मंजिल का इरादा।
चलेंगे अहिंसा पथ पर ,करते हैं हम जिन्दगी से वादा।।

आधुनिकता के संसार में, भौतिकवाद है इतना ज्यादा।
संस्कृति कभी न भूलेंगे,करते हैं हम जिन्दगी से वादा।।

जिन्दगी की राहों में कर्तव्यनिष्ठ रहने का है मेरा इरादा।
बनेंगे बेसहारे का सहारा,करते हैं हम जिन्दगी से वादा।

✍️Shiv Shilpi

बुधवार, 24 जून 2020

कविता: परिवार



पारिवारिकता की जिम्मेदारी, जिसने निज कंधों पर धारी है।
परिवार के हर सदस्य की जान,उसको खुद से ज्यादा प्यारी है।।

परिवार रूपी नाव में बैठी जितनी सवारी है,
नाव चलाना हर शख्स की जिम्मेदारी है।।

टूट रहे हैं कई परिवार ईर्ष्या की दीमक से,
ईर्ष्या का नाश कर प्रेम दीप जलाना हमारी जिम्मेदारी है।।

इक दूजे का आदर करना परिवार में,
परिवार के हर सदस्य की जिम्मेदारी है।।

जुड़ते रहते हैं सदा रिश्ते नाते परिवार में,
सभी रिश्तों का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है।।

खुशियां उस परिवार में, जहां भाई भाई में यारी है।
उत्सव आते धूम मचाते,जिन परिवारों में प्रेम की भाषा जारी है।।

कई बड़े बड़े संकट , विषम परिस्थिति भी उनसे हारी है।
जिन परिवारों में सदाचार और एकरूपता जारी है।।

नैतिक मूल्यों का होना, अति आवश्यक है परिवार में।
इक दूजे के प्रति संवेदनशील होना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।।

नारी को सम्मान देना प्रथम कर्तव्य हो परिवार में।
जहां हुआ नारी सम्मान उन परिवारों की प्रगति जारी है।।

उसने क्षमा ,दया ,करुण भावना अंतर्मन में धारी है।
पारिवारिकता की जिम्मेदारी, जिसने निज कंधों पर धारी है।।

✍️शिव शिल्पी

शनिवार, 9 मई 2020

प्रेरक कविता

जो जन आशावादी होते हैं,
वे विजय सदा ही होते हैं।

जिनके बुलंद हौसले होते हैं, 
कभी ना तूफानों से घबराते हैं। 

दृढ़ निश्चय जिनके होते हैं,
वे लक्ष्य सदा ही पाते हैं।।

जो निरत सदा सत्कर्मों में,
वे समय व्यर्थ न खोते हैं।।

जिनके नेक इरादे होते हैं,
वे नित राष्ट्र समर्पित होते हैं।।

जो जन औरों के हित जीते हैं,
जग में महापुरुष कहलाते हैं।।

जो सत्य, अहिंसा  के साधक,
वे महात्मा गांधी बन जाते है।।

✍️" शिव शिल्पी"

कविता



हर इक मौसम को ख़बर है वर्ष में आने की

हर इक अंकुर को खबर है शजर में आने की




तुम थककर रुक ना जाना मंजिल के मुसाफिर

राहों को खबर है तुम्हारी मंजिल के आने की




अंधेरों को ना गुमां हो खुद पर खुद के होने का

सूर्य को खबर है अंधेरों में उजाले लाने की




यूं तो बैठे हैं कई ओहदों पर सत्ता के छत्र तले

पर कुछ को ही खबर है देश चलाने की




पक्षी चाहे जितना उड़ ले आकाश की ऊंचाई

उसको खबर है धरातल पर उतर आने की




हर इक काफ़िए को खबर है ग़ज़ल में आने की

हर इक सरिता को खबर है संगम के आने की




लहरें चाहे जितनी विपरीत हो लें समन्दर में

हर इक कश्ती को खबर है साहिल पे आने की




हर दिन हो रहे अपराध मानवता हो गई रुखसत

हर इक मानव को खबर दो मानवता में आने की




✍️Writer: shiv

























बुधवार, 15 अप्रैल 2020

प्रेम गीत



जो मैं बन जाता झोंका हवा का अगर,
रोज छूता तुम्हे मैं शाम आे सहर।।

मैं उड़ा कर तुम्हे आसमानी डगर,

ले जाता कहीं सजर की डाल पर।।

सांसे बनकर उतरता तुम्हारे जिगर,

जो मै बन जाता झोंका हवा का अगर।।

भर के वाहों में तुमको मेरे हमसफ़र,

तुम्हारे अधरो पे करता अधर से सफर।।

 रोज मिलता मिलाता नजर से नजर,

जो मैं बन जाता झोंका हवा का अगर।।

✍️शिव शिल्पी

सोमवार, 13 अप्रैल 2020

13 अप्रैल जलियांवाला बाग हत्याकांड पर रचना।

मै बाग हूं जलियांवाला,लिए हुए कण कण में ज्वाला।
जो रक्त गिरा मेरे दामन पर ,वो रक्त था वीरों वाला।।

जब चली गोलियां डायर की, वो दृश्य था हिंसा वाला।

आज भी गुंजित है धरा, वो दृश्य था चीखों  वाला।। 

यह निर्मम हत्याकांड बना ,स्वतंत्रता की चिंगारी वाला।

जो लहू गिरा मेरे दामन पर ,वो लहू था वीरों वाला।।

देख  भीषण क्रूर कृत्य , उठा लिया वक़्त ने  भाला।

बना यही वक़्त का भाला,स्वतंत्रता की चिंगारी वाला।।

मेरी धरा पर जो रक्त गिरा,वो है महाक्रांति की ज्वाला।

मैं बाग हूं जलियांवाला,लिए हुए कण कण में ज्वाला।।

✍️कवि: shiv Shilpi

सोमवार, 23 मार्च 2020

पर्यावरण संरक्षण पर आधारित विचार

जैव विविधता मानव जीवन की कसौटी है,अर्थात प्रकृति में जीवों का होना अति आवश्यक है । आज स्थिति यह है कि जीवों की कई प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं। तो कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। जिससे जैव विविधता पर संकट मंडरा रहा है । और प्रथ्वी पर जीवन चक्र का संतुलन, जीवों की अधिकता से होता है। यह सब जानते हुए भी मानव मांसाहार का सेवन करता है ,और जो जीव मानव की खाद्य श्रृंखला (food chain) का हिस्सा नहीं है उस जीव को भी मानव अपना आहार बना लेता है ।

जैसे _सांप ,चमगादड़,चूहे,कुत्ते,छिपकली आदि।

इन सबकी अपनी अलग अलग food chain है और जब कोई जीव अपनी खाद्य श्रृंखला से बाहर दूसरी खाद्य श्रृंखला के जीवों को खाता है और शस्त्र विज्ञान के क्षेत्र में जीवों का उपयोग जैविक हथियार के निर्माण में करता है जिसके फलस्वरूप खतरनाक वायरस का जन्म होता है ।जो कि हम chorona वायरस (covid 19 ) के रूप में देख सकते हैं । कोरॉना वायरस किस प्रकार लोगो को काल के गाल में समाहित कर रहा है ,ये खतरनाक वायरस चीन में लोगों द्वारा सांप और चमगादड़ के सेवन करने से निकला। हमें अभी भी सतर्क हो जाना चाहिए ।हमें शाकाहार अपनाना होगा और मांसाहार को लेकर कानून बनाना होगा ।तभी हम प्रतिवर्ष जन्म ले रहे इन वायरस को रोक पाएंगे और साथ ही सर्वाधिक ध्यान वनों की ओर देना होगा प्रदूषण को रोकने के प्रयास करने होंगे ।क्यूंकि हर संकट हर आपदा के लिए मानव ही जिम्मेदार है मानव ने प्रकृति में हस्तक्षेप किया है जिसका बदला प्रकृति ज्वालामुखी , बाढ़, अनेक प्रकार की महामारियों के रूप में मानव से ले रही है। कृपया प्रकृति के संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करें और आने वाले संकटों से दुनिया को बचाए आने वाली पीढ़ियों को बचाएं ।

🎤युवा कवि लेखक = ✍️शिव शिल्पी

🙏धन्यवाद

Save biodiversity save life

करें जैव विविधता का संरक्षण हम ।
करें प्रण प्रकृति की रक्षा का हम।। 
करते रहे सदियों से जीवों का भक्षण हम।
अपने स्वार्थ कि खातिर करते रहे प्रकृति से छेड़खानी हम।
अब Corona का कहर देख रहे हैं हम।
मानव से कितना लड़ते आखिर वो नादान परिंदे,
प्रदूषण से कितना लड़ते आखिर वो नादान परिंदे।
लड़ते लड़ते ,सहते सहते वो चढ़ गए फांसी के फंदे।।
वहीं परिंदे धरती मां की मुस्कान हुआ करते थे ।
जिनकी कलरव से गुंजित होती है धरा प्रसन्न होते हैं हम ।
उन्हीं जीवों का करके भक्षण क्या जीवित रह पाएंगे हम ।।
गर_न कर पाए प्रकृति का संरक्षण हम।
न बचेगी दुनिया - ना बचेंगे हम ।।
गर रहना है जीवित तो पेड़ लगाएं हम ।
छोड़े मांसाहार को शाकाहार अपनाएं हम।।
करें जैव विविधता का संरक्षण हम ।
करें प्रण प्रकृति की रक्षा का हम।।

सोमवार, 9 मार्च 2020

होली

समस्त भारतवर्ष को होली महोत्सव 2020 की हार्दिक शुभकामनाएं




अंग रंग से तर व तर, होली के पावन पर्व पर।

रंग प्रेम के पंख लिए, उड़ रहा है पावन पर्व पर।।



मित्रों की टोली चल पड़ी है,प्रेम के रंग लेकर।

हर्षोल्लास संग लेकर ,आज पावन पर्व पर।।



अंग रंग से तर व तर होली के पावन पर्व पर।




होली का पावन पर्व, प्रेम का है समर।

अंग रंग से तर व तर होली के पावन पर्व पर।।



ह्रदय रूपी भूमि में, प्रेम बीज डालने।

आओ मिलकर चलें,रंग ले प्रेम के प्रसंग पर।।



प्रेम रूपी शस्त्र से, नफ़रत को मारने चलें।

प्रेम के समर में हम ,रंग लेकर हाथ पर।।



अंग रंग से तर व तर ,होली के पावन पर्व पर।

रंग प्रेम के पंख लिए उड़ रहा है पावन पर्व पर।।



हिन्द को रंग दें हम, चारों तरफ प्रेम के रंग में।

महक रंगों की बिखर जाए , विश्व में आकाश पर।।



अंग रंग से तर व तर रंगो के पावन पर्व पर।

रंग प्रेम के पंख लिए ,उड़ रहा है पावन पर्व पर।।

कवि✍️शिव शिल्पी

शुक्रवार, 6 मार्च 2020

शायरी

सभी मौसम तुम्हारे बिन वीरान लगते हैं ।
मेरे दिल के उपवन में अब पतझड़ लगते हैं ।।

ऐसी सजा दी तुमने मेरी जान, मुझे वफ़ा करने की।
ये सोच सोच कर दिल~दिमाग घबराने लगते हैं ।।

सो जाता हूं जब याद करते हुए प्रेम के लम्हे 
वो सपनों में आकर मुझे जगाने लगतें हैं ।।

कभी कभी अचानक नींद से उठ आधी रातों में
करते हैं हम कॉल उन्हें, वो व्यस्त बताने लगते हैं।।

फिर इस आशिक की आंखे नम ,आंसू बहने लगते हैं 
हम "हांथ में कलम उठा, अल्फाज लिखने लगते हैं ।।

                       ✍️शिव शिल्पी

रविवार, 1 मार्च 2020

शायरी

ऐसा मारा बेवफाई का खंजर तूने मेरे सीने में,
न मरने दिया मुझे ना जीने दिया मुझे।
       
                                     ✍️शिव

शायरी : kavi shiv shilpi