शुक्रवार, 6 मार्च 2020

शायरी

सभी मौसम तुम्हारे बिन वीरान लगते हैं ।
मेरे दिल के उपवन में अब पतझड़ लगते हैं ।।

ऐसी सजा दी तुमने मेरी जान, मुझे वफ़ा करने की।
ये सोच सोच कर दिल~दिमाग घबराने लगते हैं ।।

सो जाता हूं जब याद करते हुए प्रेम के लम्हे 
वो सपनों में आकर मुझे जगाने लगतें हैं ।।

कभी कभी अचानक नींद से उठ आधी रातों में
करते हैं हम कॉल उन्हें, वो व्यस्त बताने लगते हैं।।

फिर इस आशिक की आंखे नम ,आंसू बहने लगते हैं 
हम "हांथ में कलम उठा, अल्फाज लिखने लगते हैं ।।

                       ✍️शिव शिल्पी

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शायरी : kavi shiv shilpi