रविवार, 7 जून 2026
शायरी : kavi shiv shilpi
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
विश्व पर्यावरण दिवस :5 जून
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
शायरी : कवि शिव शिल्पी
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
कवि शिव शिल्पी
कवि शिव शिल्पी : परिचय
कवि शिव शिल्पी समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है।
शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं।
विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है।
"कलम शिव" ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है।
लेखक: शिव शिल्पी
विधा: कविता, शायरी, लेख एवं साहित्यिक चिंतन
ब्लॉग: कलम शिव
मूल मंत्र:
"शब्द केवल लिखे नहीं जाते, वे जीए भी जाते हैं।"
✒️ कवि : शिव शिल्पी
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
सोमवार, 12 अक्टूबर 2020
देश की सीमा पर तैनात जवान
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
सोमवार, 27 जुलाई 2020
चाय

हर सुबह जो छू लेती हो लबों को तुम
ताजगी लेकर उतरती हो रगों में तुम
हर घर में हर नुक्कड़ पर चाय के चर्चे हैं
शान्ति लेकर उतरती हो मनो में तुम
✍🏻शिव शिल्पी
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
शायरी
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
शुक्रवार, 24 जुलाई 2020
सुविचार
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
गुरुवार, 23 जुलाई 2020
गजल
वज्न :122 122 122
विधा :नज़्म
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कहां तुम चले जा रहे हो
यहां से नजर आ रहे हो
सही राह तुम भूलकर के
गलत राह तुम जा रहे हो
तमों का बसेरा वहां पर
जहां आज तुम जा रहे हो
मंजर भी हिंसक हैं जहां के
उसी राह तुम जा रहे हो
कमाई गई शोहरत जो
मिटाने उसे जा रहे हो
नशा लोभ लालच जहां पर
वहां तुम चले जा रहे हो
✍🏻शिव शिल्पी
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
मुक्तक
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
रविवार, 19 जुलाई 2020
कविता : मौन की शक्ति
विधा : कविता
"मौन की शक्ति"
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मौन आत्मज्ञान का द्वार है
मौन शांति का आगार है
है शीतलता का प्रखर स्त्रोत,
मौन की शक्ति अपरम्पार है।
मौन शक्तियों का मूल मंत्र है
निश्चिंतता का सबल आधार है
है बुद्धिमत्ता का मूल स्रोत
मौन की शक्ति अपरम्पार है।।
तपस्वियों के तप से तपोभूमि का
कण कण मौन तत्व से साकार है
कुशल व्यवहार का प्रखर स्रोत है
मौन की शक्ति अपरम्पार है।।
मौन रहना स्वयं का साक्षात्कार है
मौन स्वाध्याय का प्रमुख आधार है
स्वयं महादेव भी मौन के धारक हैं
मौन की शक्ति अपरम्पार है।।
लेखक✍🏻: शिव शिल्पी
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
शनिवार, 27 जून 2020
Respect for women
You are an indelible symbol of cleanness.
You are responsible for coldness.
Women, you are the true story of love in the world.
This is a sign of beauty
You give birth to a human and you are Kalratri for the wicked.
You fought so many battle, killed the wicked.
You are the basis of every story in history.
You make the house a heaven, and teach children the values.
Woman, you have created many patterns of success.
Lakshmibai has fought battle to protect the country.
Kalpana Chawla has Sunita Williams set foot in space.
You are reaching every new target.
You bless your parents by becoming a daughter.
Being a sister, she ties a bond on her brother's wrist.
Being a wife, you show beauty.
As a mother, you love children.
You are the one who teaches the first step.
You play many characters in the world, so you are called Shakti.
You deserve great respect.
Where you are a precious jewel, you are the hallmark of greatness.
✍️Shiv Shilpi
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
गुरुवार, 25 जून 2020
कविता :जिंदगी से वादा
तूफान चाहे जितने आएं ,सह लेंगे हम हद से ज्यादा।
नहीं करेंगे आत्महत्या ,करते हैं हम जिन्दगी से वादा।।
सत्य असत्य चौसर के मोहरे,दोनों का है अलग इरादा।
सदैव सत्य अपनाएंगे ,करते हैं हम जिन्दगी से वादा।।
भूलेंगे न संस्कारों को, गर बन भी जाएं हम शहजादा।
भूलेंगे न मात पिता को,करते हैं हम जिन्दगी से वादा।।
नहीं करेंगे किसी की हानि, हम रखें हमेशा नेक इरादा।
सदा करेंगे परोपकार, करते हैं हम जिन्दगी से वादा।।
सद्गुणों को धारण करके ,फिर करें मंजिल का इरादा।
चलेंगे अहिंसा पथ पर ,करते हैं हम जिन्दगी से वादा।।
आधुनिकता के संसार में, भौतिकवाद है इतना ज्यादा।
संस्कृति कभी न भूलेंगे,करते हैं हम जिन्दगी से वादा।।
जिन्दगी की राहों में कर्तव्यनिष्ठ रहने का है मेरा इरादा।
बनेंगे बेसहारे का सहारा,करते हैं हम जिन्दगी से वादा।
✍️Shiv Shilpi
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
बुधवार, 24 जून 2020
कविता: परिवार
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
शनिवार, 9 मई 2020
प्रेरक कविता
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
कविता
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
बुधवार, 15 अप्रैल 2020
प्रेम गीत
जो मैं बन जाता झोंका हवा का अगर,
रोज छूता तुम्हे मैं शाम आे सहर।।
मैं उड़ा कर तुम्हे आसमानी डगर,
ले जाता कहीं सजर की डाल पर।।
सांसे बनकर उतरता तुम्हारे जिगर,
जो मै बन जाता झोंका हवा का अगर।।
भर के वाहों में तुमको मेरे हमसफ़र,
तुम्हारे अधरो पे करता अधर से सफर।।
रोज मिलता मिलाता नजर से नजर,
जो मैं बन जाता झोंका हवा का अगर।।
✍️शिव शिल्पी
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
सोमवार, 13 अप्रैल 2020
13 अप्रैल जलियांवाला बाग हत्याकांड पर रचना।
जो रक्त गिरा मेरे दामन पर ,वो रक्त था वीरों वाला।।
जब चली गोलियां डायर की, वो दृश्य था हिंसा वाला।
आज भी गुंजित है धरा, वो दृश्य था चीखों वाला।।
यह निर्मम हत्याकांड बना ,स्वतंत्रता की चिंगारी वाला।
जो लहू गिरा मेरे दामन पर ,वो लहू था वीरों वाला।।
देख भीषण क्रूर कृत्य , उठा लिया वक़्त ने भाला।
बना यही वक़्त का भाला,स्वतंत्रता की चिंगारी वाला।।
मेरी धरा पर जो रक्त गिरा,वो है महाक्रांति की ज्वाला।
मैं बाग हूं जलियांवाला,लिए हुए कण कण में ज्वाला।।
✍️कवि: shiv Shilpi
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
सोमवार, 23 मार्च 2020
पर्यावरण संरक्षण पर आधारित विचार
जैसे _सांप ,चमगादड़,चूहे,कुत्ते,छिपकली आदि।
इन सबकी अपनी अलग अलग food chain है और जब कोई जीव अपनी खाद्य श्रृंखला से बाहर दूसरी खाद्य श्रृंखला के जीवों को खाता है और शस्त्र विज्ञान के क्षेत्र में जीवों का उपयोग जैविक हथियार के निर्माण में करता है जिसके फलस्वरूप खतरनाक वायरस का जन्म होता है ।जो कि हम chorona वायरस (covid 19 ) के रूप में देख सकते हैं । कोरॉना वायरस किस प्रकार लोगो को काल के गाल में समाहित कर रहा है ,ये खतरनाक वायरस चीन में लोगों द्वारा सांप और चमगादड़ के सेवन करने से निकला। हमें अभी भी सतर्क हो जाना चाहिए ।हमें शाकाहार अपनाना होगा और मांसाहार को लेकर कानून बनाना होगा ।तभी हम प्रतिवर्ष जन्म ले रहे इन वायरस को रोक पाएंगे और साथ ही सर्वाधिक ध्यान वनों की ओर देना होगा प्रदूषण को रोकने के प्रयास करने होंगे ।क्यूंकि हर संकट हर आपदा के लिए मानव ही जिम्मेदार है मानव ने प्रकृति में हस्तक्षेप किया है जिसका बदला प्रकृति ज्वालामुखी , बाढ़, अनेक प्रकार की महामारियों के रूप में मानव से ले रही है। कृपया प्रकृति के संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करें और आने वाले संकटों से दुनिया को बचाए आने वाली पीढ़ियों को बचाएं ।
🎤युवा कवि लेखक = ✍️शिव शिल्पी
🙏धन्यवाद
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
Save biodiversity save life
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
सोमवार, 9 मार्च 2020
होली
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
शुक्रवार, 6 मार्च 2020
शायरी
मेरे दिल के उपवन में अब पतझड़ लगते हैं ।।
ऐसी सजा दी तुमने मेरी जान, मुझे वफ़ा करने की।
ये सोच सोच कर दिल~दिमाग घबराने लगते हैं ।।
सो जाता हूं जब याद करते हुए प्रेम के लम्हे
वो सपनों में आकर मुझे जगाने लगतें हैं ।।
कभी कभी अचानक नींद से उठ आधी रातों में
करते हैं हम कॉल उन्हें, वो व्यस्त बताने लगते हैं।।
फिर इस आशिक की आंखे नम ,आंसू बहने लगते हैं
हम "हांथ में कलम उठा, अल्फाज लिखने लगते हैं ।।
✍️शिव शिल्पी
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
रविवार, 1 मार्च 2020
शायरी
कवि शिव शिल्पी : समकालीन हिंदी साहित्य के युवा रचनाकार हैं, जो अपनी कविताओं, शायरियों और विचारप्रधान लेखन के माध्यम से समाज, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, प्रकृति तथा जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, गहरी अनुभूति और यथार्थ का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। शिव शिल्पी का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। उनकी कविताएँ पाठकों को आत्ममंथन, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं। वे प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, मानवीय संबंधों और जीवन-संघर्ष जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते हैं। विभिन्न सामाजिक एवं डिजिटल मंचों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित और साझा की जाती हैं, जहाँ उन्हें पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन प्राप्त होता है। उनकी लेखनी में भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विचारों की दृढ़ता भी दिखाई देती है, जो पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। **"कलम शिव"** ब्लॉग के माध्यम से कवि शिव शिल्पी अपनी मौलिक कविताएँ, शायरियाँ, लेख तथा साहित्यिक विचार पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनका उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को साहित्य और सृजन से जोड़ना है। **लेखक:** शिव शिल्पी **
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मै बाग हूं जलियांवाला,लिए हुए कण कण में ज्वाला। जो रक्त गिरा मेरे दामन पर ,वो रक्त था वीरों वाला।। जब चली गोलियां डायर की, वो दृश्य था ह...
























