बुधवार, 24 जून 2020

कविता: परिवार



पारिवारिकता की जिम्मेदारी, जिसने निज कंधों पर धारी है।
परिवार के हर सदस्य की जान,उसको खुद से ज्यादा प्यारी है।।

परिवार रूपी नाव में बैठी जितनी सवारी है,
नाव चलाना हर शख्स की जिम्मेदारी है।।

टूट रहे हैं कई परिवार ईर्ष्या की दीमक से,
ईर्ष्या का नाश कर प्रेम दीप जलाना हमारी जिम्मेदारी है।।

इक दूजे का आदर करना परिवार में,
परिवार के हर सदस्य की जिम्मेदारी है।।

जुड़ते रहते हैं सदा रिश्ते नाते परिवार में,
सभी रिश्तों का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है।।

खुशियां उस परिवार में, जहां भाई भाई में यारी है।
उत्सव आते धूम मचाते,जिन परिवारों में प्रेम की भाषा जारी है।।

कई बड़े बड़े संकट , विषम परिस्थिति भी उनसे हारी है।
जिन परिवारों में सदाचार और एकरूपता जारी है।।

नैतिक मूल्यों का होना, अति आवश्यक है परिवार में।
इक दूजे के प्रति संवेदनशील होना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।।

नारी को सम्मान देना प्रथम कर्तव्य हो परिवार में।
जहां हुआ नारी सम्मान उन परिवारों की प्रगति जारी है।।

उसने क्षमा ,दया ,करुण भावना अंतर्मन में धारी है।
पारिवारिकता की जिम्मेदारी, जिसने निज कंधों पर धारी है।।

✍️शिव शिल्पी

कोई टिप्पणी नहीं:

शायरी : kavi shiv shilpi