सोमवार, 27 जुलाई 2020

चाय



हर सुबह जो छू लेती हो लबों को तुम
ताजगी लेकर  उतरती  हो रगों में तुम
हर घर में हर नुक्कड़ पर चाय के चर्चे हैं
शान्ति लेकर  उतरती हो  मनो  में तुम

✍🏻शिव शिल्पी

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शायरी : kavi shiv shilpi