गुरुवार, 23 जुलाई 2020

मुक्तक

गिरहबन्द कत्आ\ मुक्तक"
अर्कान : - मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन
वज्न :-1222 1222 122
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गरल अब वो उगलते जा रहे हैं
बुराईयों में ढलते जा रहे हैं।
मिटा कर नाम मेरा अपने दिल से,
वो अब तेवर बदलते जा रहे हैं।।

Writer :Shiv Shilpi





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शायरी : kavi shiv shilpi